बनाने के लिए ही किसी दुश्ट चितेरे ने जान-बुझकर कबूतर के बच्चों के श्शोक की इस पृश्ठीाूमि का चयन किया है? यह तनाव मन के लिए असह्म था। भूमि पर लेटे लेटे ही आंख लग गई। इतने में-
’’उठिए, अरे सो रहे हैं क्या! साहब!, काम के समय आपको यदि साहब ने सोते हुए देख लिया तो वे हमें क्या कहंेगे।’’ दरवाजे की सलाखों पर अपना डंडा जोर-जोर से खड़काते हुए सिपाही बोला।
मैं उठ गया। पुनः वही तूमार- उसे कूटना-खोलना-वही पिश्टपेशण ं ं ं ं ं ं
बनाने के लिए ही किसी दुश्ट चितेरे ने जान-बुझकर कबूतर के बच्चों के श्शोक की इस पृश्ठीाूमि का चयन किया है? यह तनाव मन के लिए असह्म था। भूमि पर लेटे लेटे ही आंख लग गई। इतने में-
’’उठिए, अरे सो रहे हैं क्या! साहब!, काम के समय आपको यदि साहब ने सोते हुए देख लिया तो वे हमें क्या कहंेगे।’’ दरवाजे की सलाखों पर अपना डंडा जोर-जोर से खड़काते हुए सिपाही बोला।
मैं उठ गया। पुनः वही तूमार- उसे कूटना-खोलना-वही पिश्टपेशण ं ं ं ं ं ं