यथा प्रमाण कह देंगे। यदि ऐसा दिन इस जिंदगी के दौरान निकलकर नहीं आया, तो नहीं कहेंगें यदि उस वृत्तांत को जगत ने नहीं सुना तो उस वजह से उसका महत्व तो कम नहीं होगा अथवा उसकी तीव्रता कम नहीं होगी, अथवा इस विश्व की विराट् दिनचर्या में वह सब अनसुना रहने के कारण कोई बड़ी रूकावट आनेवाली है, ऐसा भी नहीं। ऐसी हमारी सोच थी।
चित्त की ऐसी दोलायमान अवस्था में आज तक अंदमान के हमारे संस्करण हमारे प्रिय बंधुओं को सुनाने का काम वैसा ही
यथा प्रमाण कह देंगे। यदि ऐसा दिन इस जिंदगी के दौरान निकलकर नहीं आया, तो नहीं कहेंगें यदि उस वृत्तांत को जगत ने नहीं सुना तो उस वजह से उसका महत्व तो कम नहीं होगा अथवा उसकी तीव्रता कम नहीं होगी, अथवा इस विश्व की विराट् दिनचर्या में वह सब अनसुना रहने के कारण कोई बड़ी रूकावट आनेवाली है, ऐसा भी नहीं। ऐसी हमारी सोच थी।
चित्त की ऐसी दोलायमान अवस्था में आज तक अंदमान के हमारे संस्करण हमारे प्रिय बंधुओं को सुनाने का काम वैसा ही