ऐसा होगा तो कुल मेहनत ही बरबाद हो जाएगी। देखिए आप भी इसी बाग में बेहोश किए गए थे, जब कैदी बना कर लाए थे और प्यास लगने पर एक कटोरा पानी पीया था, उसी वक्त बेहोश हो गए और खोह में ले जा कर रख दिए गए थे। अगर ऐसा न हुआ होता तो उसी समय कुछ-न-कुछ हाल यहाँ का मिल गया होता। फिर मैं यह भी सोचता हूँ कि अगर हम लोग वहाँ जा कर भोजन से इनकार करेंगे तो ठीक न होगा क्योंकि दावत कबूल करके मौके पर खाने से इनकार कर जाना उचित नहीं है।’
देवीसिंह – ‘तो फिर इसकी तरकीब क्या सोची है?’
ऐसा होगा तो कुल मेहनत ही बरबाद हो जाएगी। देखिए आप भी इसी बाग में बेहोश किए गए थे, जब कैदी बना कर लाए थे और प्यास लगने पर एक कटोरा पानी पीया था, उसी वक्त बेहोश हो गए और खोह में ले जा कर रख दिए गए थे। अगर ऐसा न हुआ होता तो उसी समय कुछ-न-कुछ हाल यहाँ का मिल गया होता। फिर मैं यह भी सोचता हूँ कि अगर हम लोग वहाँ जा कर भोजन से इनकार करेंगे तो ठीक न होगा क्योंकि दावत कबूल करके मौके पर खाने से इनकार कर जाना उचित नहीं है।’
देवीसिंह – ‘तो फिर इसकी तरकीब क्या सोची है?’