चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

बेचारे सिद्धनाथ कुछ अपने वास्ते थोड़े ही कहते थे।’

वनकन्या – ‘यह सब सच है, मगर क्या करें बिना देखे जी जो नहीं मानता।’

सब्ज सखी – ‘हम दोनों को तो यही हुक्म दे दिया था कि बराबर घूम-घूम कर कुमार की मदद किया करो। मालिन रूपी बद्रीनाथ से कैसा बचाया था।’

सुर्ख सखी – ‘क्या ऐयार लोग पता लगाने की कम कोशिश करते थे? मगर यहाँ तो ऐयारों के गुरुघंटाल सिद्धनाथ हरदम मदद पर थे, उनके किए हो क्या सकता था? देखो गंगा जी में नाव के पास आते वक्त तेजसिंह,


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बेचारे सिद्धनाथ कुछ अपने वास्ते थोड़े ही कहते थे।’

वनकन्या – ‘यह सब सच है, मगर क्या करें बिना देखे जी जो नहीं मानता।’

सब्ज सखी – ‘हम दोनों को तो यही हुक्म दे दिया था कि बराबर घूम-घूम कर कुमार की मदद किया करो। मालिन रूपी बद्रीनाथ से कैसा बचाया था।’

सुर्ख सखी – ‘क्या ऐयार लोग पता लगाने की कम कोशिश करते थे? मगर यहाँ तो ऐयारों के गुरुघंटाल सिद्धनाथ हरदम मदद पर थे, उनके किए हो क्या सकता था? देखो गंगा जी में नाव के पास आते वक्त तेजसिंह,


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