चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

को दरख्त से खोल उस पर सवार हुए और अपने किले की तरफ चल चले गये।

ऐयार उसको कहते हैं जो हर एक फन जानता हो, शक्ल बदलना और दौड़ना उसका मुख्य काम है।

चन्द्रकान्ता ( पहला भाग : दुसरा बयान )
विजयगढ़ में क्रूरसिंह अपनी बैठक के अन्दर नाजिम और अहमद दोनों ऐयारों के साथ बैठा बातें कर रहा है।

क्रूर – देखो नाजिम, महाराज को तो यह ख्याल है कि मैं राजा होकर मन्ञी के लड़के को कैसे दामाद बनाऊँ, और चन्द्रकान्ता बीरेन्द्रसिंह को चाहती है,


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को दरख्त से खोल उस पर सवार हुए और अपने किले की तरफ चल चले गये।

ऐयार उसको कहते हैं जो हर एक फन जानता हो, शक्ल बदलना और दौड़ना उसका मुख्य काम है।

चन्द्रकान्ता ( पहला भाग : दुसरा बयान )
विजयगढ़ में क्रूरसिंह अपनी बैठक के अन्दर नाजिम और अहमद दोनों ऐयारों के साथ बैठा बातें कर रहा है।

क्रूर – देखो नाजिम, महाराज को तो यह ख्याल है कि मैं राजा होकर मन्ञी के लड़के को कैसे दामाद बनाऊँ, और चन्द्रकान्ता बीरेन्द्रसिंह को चाहती है,


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