जिसे इतनी देर तक मैं ताज्जुब से देख रहा था। वह दोनों पहाड़ियों के बीच में जो दरवाज़ा खुला नज़र आ रहा है, वो पहले बन्द था, यही ताज्जुब की बात थी। अब चलिये, मगर हम लोगों को कल फिर यहां लौटना पड़ेगा। यह तिलिस्म ऐसी राह पर बना हुआ है कि अन्दर वहां तक आने में लगभग पांच कोस का फासला मालूम पड़ता है और बाहर की राह से अगर इस तहखाने तक आवें तो पन्द्रह कोस चलना पड़ेगा।
कुमार : खैर, यहां से चलो, मगर इस हाल का खुलासा सुने बिना तबीयत घबरा रही है।
जिसे इतनी देर तक मैं ताज्जुब से देख रहा था। वह दोनों पहाड़ियों के बीच में जो दरवाज़ा खुला नज़र आ रहा है, वो पहले बन्द था, यही ताज्जुब की बात थी। अब चलिये, मगर हम लोगों को कल फिर यहां लौटना पड़ेगा। यह तिलिस्म ऐसी राह पर बना हुआ है कि अन्दर वहां तक आने में लगभग पांच कोस का फासला मालूम पड़ता है और बाहर की राह से अगर इस तहखाने तक आवें तो पन्द्रह कोस चलना पड़ेगा।
कुमार : खैर, यहां से चलो, मगर इस हाल का खुलासा सुने बिना तबीयत घबरा रही है।