जिस तरह चारों आदमी तिलिस्म की राह से यहां तक पहुंचे थे उसी तरह तिलिस्म के बाहर हुए। आज उन लोगों को बाहर आने तक आधी रात बीत गयी। इनके लश्कर वाले घबरा रहे थे पहले तो पहर दिन बाकी रहते बाहर निकल आते थे, आज क्या देर हुई? जब वे लोग खेमे में पहुंचे तो सभी का जी ठिकाने हुआ। तेज़सिंह ने कुमार से कहा, ‘‘इस वक़्त आप सो जायें कल आपसे कुछ कहना है, कहूंगा।’’
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : तीसरा बयान)
यह तो मालूम है कि कुमारी चन्द्रकान्ता जीती हैं। मगर कहां हैं,
जिस तरह चारों आदमी तिलिस्म की राह से यहां तक पहुंचे थे उसी तरह तिलिस्म के बाहर हुए। आज उन लोगों को बाहर आने तक आधी रात बीत गयी। इनके लश्कर वाले घबरा रहे थे पहले तो पहर दिन बाकी रहते बाहर निकल आते थे, आज क्या देर हुई? जब वे लोग खेमे में पहुंचे तो सभी का जी ठिकाने हुआ। तेज़सिंह ने कुमार से कहा, ‘‘इस वक़्त आप सो जायें कल आपसे कुछ कहना है, कहूंगा।’’
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : तीसरा बयान)
यह तो मालूम है कि कुमारी चन्द्रकान्ता जीती हैं। मगर कहां हैं,