और उस खोह में से क्यों निकल गयीं, वनकन्या कौन है, योगी जी कहां से आये, तेज़सिंह को उन्होंने क्या दिखाया? इत्यादि बातों को सोचते और खयाल दौड़ाते कुमार ने सुबह कर दी, एक घड़ी की नींद नहीं आयी। अभी सवेरा नहीं हुआ था कि पलंग से उतर जल्दी के मारे खुद तेज़सिंह के डेरे में गये। वे अभी तक सोये थे, उन्हें जगाया।
तेज़सिंह ने उठकर कुमार को सलाम किया। जी में समझ ही गये थे वही बात पूछने के लिए कुमार बेताब हैं और इसी से इन्होंने आकर मुझे इतनी जल्दी उठाया है मगर फिर भी पूछा,
और उस खोह में से क्यों निकल गयीं, वनकन्या कौन है, योगी जी कहां से आये, तेज़सिंह को उन्होंने क्या दिखाया? इत्यादि बातों को सोचते और खयाल दौड़ाते कुमार ने सुबह कर दी, एक घड़ी की नींद नहीं आयी। अभी सवेरा नहीं हुआ था कि पलंग से उतर जल्दी के मारे खुद तेज़सिंह के डेरे में गये। वे अभी तक सोये थे, उन्हें जगाया।
तेज़सिंह ने उठकर कुमार को सलाम किया। जी में समझ ही गये थे वही बात पूछने के लिए कुमार बेताब हैं और इसी से इन्होंने आकर मुझे इतनी जल्दी उठाया है मगर फिर भी पूछा,