‘‘कहिये, क्या है जो इतने सवेरे आप उठे हैं?’’
कुमार : रात भी नींद नहीं आयी, अब जो कुछ कहना हो जल्दी कहो, जी बेचैन है।
तेज़सिंह : अच्छा, आप बैठिये मैं कहता हूं।
कुमार बैठ गये और देवीसिंह तथा ज्योतिषीजी को भी उसी जगह बुलवा भेजा। जब वे आ गये, तेज़सिंह ने कहना शुरू किया, ‘‘यह तो मुझे अभी तक मालूम नहीं हुआ कि कुमारी चन्द्रकान्ता को कौन ले गया या वह योगी कौन थे और वनकन्या की मदद क्यों करने लगे? मगर उन्होंने जो कुछ दिखाया
‘‘कहिये, क्या है जो इतने सवेरे आप उठे हैं?’’
कुमार : रात भी नींद नहीं आयी, अब जो कुछ कहना हो जल्दी कहो, जी बेचैन है।
तेज़सिंह : अच्छा, आप बैठिये मैं कहता हूं।
कुमार बैठ गये और देवीसिंह तथा ज्योतिषीजी को भी उसी जगह बुलवा भेजा। जब वे आ गये, तेज़सिंह ने कहना शुरू किया, ‘‘यह तो मुझे अभी तक मालूम नहीं हुआ कि कुमारी चन्द्रकान्ता को कौन ले गया या वह योगी कौन थे और वनकन्या की मदद क्यों करने लगे? मगर उन्होंने जो कुछ दिखाया