फौरन उसी जगह से ज़मीन फट गई और नीचे उतरने के लिए छोटी-छोटी सीढ़ियां नज़र पड़ीं। खुशी-खुशी ये चारों आदमी नीचे उतरे। वहां एक अंधेरी कोठरी में घूम-घूम कर इन लोगों को कोई दूसरा दरवाज़ा खोजना पड़ा मगर पता न लगा। लाचार होकर फिर बाहर निकल आये, लेकिन वह फटी हुई ज़मीन फिर न जुटी, उसी तरह खुली रह गयी। तेज़सिंह ने कहा, ‘‘मालूम होता है कि भीतर से बन्द करने की कोई युक्ति इसमें भी है जो हम लोगों को मालूम नहीं, खैर जो भी हो काम कुछ
फौरन उसी जगह से ज़मीन फट गई और नीचे उतरने के लिए छोटी-छोटी सीढ़ियां नज़र पड़ीं। खुशी-खुशी ये चारों आदमी नीचे उतरे। वहां एक अंधेरी कोठरी में घूम-घूम कर इन लोगों को कोई दूसरा दरवाज़ा खोजना पड़ा मगर पता न लगा। लाचार होकर फिर बाहर निकल आये, लेकिन वह फटी हुई ज़मीन फिर न जुटी, उसी तरह खुली रह गयी। तेज़सिंह ने कहा, ‘‘मालूम होता है कि भीतर से बन्द करने की कोई युक्ति इसमें भी है जो हम लोगों को मालूम नहीं, खैर जो भी हो काम कुछ