न निकला अब बिना बाहर की राह इस खोज में आये कोई मतलब सिद्ध नहीं होगा। चारों आदमी तिलिस्म के बाहर हुए। तेज़सिंह ने ताला बन्द कर दिया।* (*जिस चबूतरे पर पत्थर का आदमी सोया था उसके सिहराने की तरफ दो पत्थर रख कर ताला बन्द कर देते थे।। वही तिसिल्म का मुंह बन्द कर देना या ताला बन्द कर देना था, फिर कोई खोल नहीं सकता था।)
एक रोज़ टिक कर कुंवर वीरेन्द्रसिंह ने फतहसिंह सेनापति को नायब मुकर्रर करके चुनार भेज देने के बाद नौगढ़ की
न निकला अब बिना बाहर की राह इस खोज में आये कोई मतलब सिद्ध नहीं होगा। चारों आदमी तिलिस्म के बाहर हुए। तेज़सिंह ने ताला बन्द कर दिया।* (*जिस चबूतरे पर पत्थर का आदमी सोया था उसके सिहराने की तरफ दो पत्थर रख कर ताला बन्द कर देते थे।। वही तिसिल्म का मुंह बन्द कर देना या ताला बन्द कर देना था, फिर कोई खोल नहीं सकता था।)
एक रोज़ टिक कर कुंवर वीरेन्द्रसिंह ने फतहसिंह सेनापति को नायब मुकर्रर करके चुनार भेज देने के बाद नौगढ़ की