चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

में खुल जायेगा। लेकिन तिलिस्म फतह करने के पहले दो काम करो, एक तो थोड़े आदमी ले जाओ और महाराज शिवदत्त को उनकी रानी समेत भेजवा दो, दूसरे जब खोह के अन्दर जाना तो दरवाज़ा भीतर से बन्द कर लेना। अब महाराज से मुलाकात करने और कुछ पूछने की ज़रूरत नहीं, तुम लोग इसी वक़्त यहां से कूच कर जाओ और रानी के वास्ते एक डोली भी साथ लिवाते जाओ।’’

कुंवर वीरेन्द्रसिंह ने तीनों ऐयारों और थोड़े से आदमियों को साथ ले खोह की तरफ कूच किया। सुबह


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में खुल जायेगा। लेकिन तिलिस्म फतह करने के पहले दो काम करो, एक तो थोड़े आदमी ले जाओ और महाराज शिवदत्त को उनकी रानी समेत भेजवा दो, दूसरे जब खोह के अन्दर जाना तो दरवाज़ा भीतर से बन्द कर लेना। अब महाराज से मुलाकात करने और कुछ पूछने की ज़रूरत नहीं, तुम लोग इसी वक़्त यहां से कूच कर जाओ और रानी के वास्ते एक डोली भी साथ लिवाते जाओ।’’

कुंवर वीरेन्द्रसिंह ने तीनों ऐयारों और थोड़े से आदमियों को साथ ले खोह की तरफ कूच किया। सुबह


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