होते-होते ये लोग वहां पहुंचे। सिपाहियों को कुछ दूर छोड़ चारों आदमी खोह का दरवाज़ा खोल कर अन्दर गये।
सवेरा हो गया था, तेज़सिंह ने महाराज शिवदत्त और उनकी रानी को खोह के बाहर लाकर सिपाहियों के सुपुर्द किया और महाराज शिवदत्त को पैदल और उनकी रानी को डोली पर चढ़ाकर जल्दी नौगढ़ पहुंचाने के लिए ताकीद करके फिर खोह के अन्दर पहुंचे।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : चौथा बयान)
राजा सुरेन्द्रसिंह के सिपाहियों ने महाराज शिवदत्त और उनकी
होते-होते ये लोग वहां पहुंचे। सिपाहियों को कुछ दूर छोड़ चारों आदमी खोह का दरवाज़ा खोल कर अन्दर गये।
सवेरा हो गया था, तेज़सिंह ने महाराज शिवदत्त और उनकी रानी को खोह के बाहर लाकर सिपाहियों के सुपुर्द किया और महाराज शिवदत्त को पैदल और उनकी रानी को डोली पर चढ़ाकर जल्दी नौगढ़ पहुंचाने के लिए ताकीद करके फिर खोह के अन्दर पहुंचे।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : चौथा बयान)
राजा सुरेन्द्रसिंह के सिपाहियों ने महाराज शिवदत्त और उनकी