रानी को नौगढ़ पहुंचाया। जीतसिंह की राय से उन दोनों के रहने के लिए सुन्दर मकान दिया गया। उनकी हथकड़ी-बेड़ी खोल दी गयी, मगर हिफाज़त के लिए मकान के चारों तरफ सख्त पहरा मुकर्रर कर दिया गया।
दूसरे दिन राजा सुरेन्द्रसिंह और जीतसिंह आपस में कुछ राय करके पंडित बद्रीनाथ, पन्नालाल, रामनारायण और चुन्नीलाल इन चारों क़ैदी ऐयारों को साथ ले उस मकान में गये जिसमें महाराज शिवदत्त और उनकी महारानी को रक्खा था।
राजा सुरेन्द्रसिंह के आने
रानी को नौगढ़ पहुंचाया। जीतसिंह की राय से उन दोनों के रहने के लिए सुन्दर मकान दिया गया। उनकी हथकड़ी-बेड़ी खोल दी गयी, मगर हिफाज़त के लिए मकान के चारों तरफ सख्त पहरा मुकर्रर कर दिया गया।
दूसरे दिन राजा सुरेन्द्रसिंह और जीतसिंह आपस में कुछ राय करके पंडित बद्रीनाथ, पन्नालाल, रामनारायण और चुन्नीलाल इन चारों क़ैदी ऐयारों को साथ ले उस मकान में गये जिसमें महाराज शिवदत्त और उनकी महारानी को रक्खा था।
राजा सुरेन्द्रसिंह के आने