की खबर सुनकर महाराज शिवदत्त अपनी रानी को साथ लेकर दरवाज़े तक इस्तकबाल (आगवानी) के लिए आये और मकान में ले जाकर आदर के साथ बैठाया, इसके बाद खुद दोनों आदमी सामने बैठे। हथकड़ी और बेड़ी पहने ऐयार सभी एक तरफ बैठाये गये। महाराज शिवदत्त ने पूछा, ‘‘इस वक़्त आपने किसलिए तकलीफ की?
राजा सुरेन्द्रसिंह ने इसके जवाब में कहा, ‘‘आज तक आपके जी में जो कुछ आया, किया, क्रूरसिंह के बहकाने से हम लोगों को तकलीफ देने के लिए बहुत कुछ उपाय किये,
की खबर सुनकर महाराज शिवदत्त अपनी रानी को साथ लेकर दरवाज़े तक इस्तकबाल (आगवानी) के लिए आये और मकान में ले जाकर आदर के साथ बैठाया, इसके बाद खुद दोनों आदमी सामने बैठे। हथकड़ी और बेड़ी पहने ऐयार सभी एक तरफ बैठाये गये। महाराज शिवदत्त ने पूछा, ‘‘इस वक़्त आपने किसलिए तकलीफ की?
राजा सुरेन्द्रसिंह ने इसके जवाब में कहा, ‘‘आज तक आपके जी में जो कुछ आया, किया, क्रूरसिंह के बहकाने से हम लोगों को तकलीफ देने के लिए बहुत कुछ उपाय किये,