बाद महाराज शिवदत्त की तरफ देखकर पंडित बद्रीनाथ ने कहा, ‘‘आप तो अब तपस्या करने जाते हैं हम लोगों के लिए क्या हुक्म होता है?’’
शिव : जो तुम लोगों के जी में आये वो करो, जहां चाहो जाओ, हमने अपनी तरफ से तुम लोगों को छुट्टी दे दी, बल्कि अच्छी बात हो कि तुम लोग कुंवर वीरेन्द्रसिंह के साथ रहना पसन्द करो, क्योंकि ऐसा बहादुर और धार्मिक राजा तुम लोगों को न मिलेगा।
बद्रीनाथ : ईश्वर आपको सुखी रक्खे! आज से हम लोग कुंवर वीरेन्द्रसिंह के हुए,
बाद महाराज शिवदत्त की तरफ देखकर पंडित बद्रीनाथ ने कहा, ‘‘आप तो अब तपस्या करने जाते हैं हम लोगों के लिए क्या हुक्म होता है?’’
शिव : जो तुम लोगों के जी में आये वो करो, जहां चाहो जाओ, हमने अपनी तरफ से तुम लोगों को छुट्टी दे दी, बल्कि अच्छी बात हो कि तुम लोग कुंवर वीरेन्द्रसिंह के साथ रहना पसन्द करो, क्योंकि ऐसा बहादुर और धार्मिक राजा तुम लोगों को न मिलेगा।
बद्रीनाथ : ईश्वर आपको सुखी रक्खे! आज से हम लोग कुंवर वीरेन्द्रसिंह के हुए,