चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

आप अपने हाथों से हमारी हथकड़ी-बेड़ी खोल दीजिए, महाराज शिवदत्त ने अपने हाथों से चारों ऐयारों की हथकड़ी-बेड़ी खोल दी राजा सुरेन्द्रसिंह और तेज़सिंह ने कुछ भी न कहा कि आप इनकी बेड़ी क्यों खोलते हैं। हथकड़ी-बेड़ी खुलने के बाद चारों ऐयार राजा सुरेन्द्रसिंह के पीछे जा कर जा खड़े हुए। जीतसिंह ने कहा, ‘‘अभी एक दफे आप लोग चारों ऐयार मेरे सामने आइये, फिर वहां जाकर खड़े होइये, पहले अपनी मामूली सी रस्म तो अदा कर लीजिए।’’

मुस्कुराते हुए पं. बद्रीनाथ,


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आप अपने हाथों से हमारी हथकड़ी-बेड़ी खोल दीजिए, महाराज शिवदत्त ने अपने हाथों से चारों ऐयारों की हथकड़ी-बेड़ी खोल दी राजा सुरेन्द्रसिंह और तेज़सिंह ने कुछ भी न कहा कि आप इनकी बेड़ी क्यों खोलते हैं। हथकड़ी-बेड़ी खुलने के बाद चारों ऐयार राजा सुरेन्द्रसिंह के पीछे जा कर जा खड़े हुए। जीतसिंह ने कहा, ‘‘अभी एक दफे आप लोग चारों ऐयार मेरे सामने आइये, फिर वहां जाकर खड़े होइये, पहले अपनी मामूली सी रस्म तो अदा कर लीजिए।’’

मुस्कुराते हुए पं. बद्रीनाथ,


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