पन्नालाल, रामनारायण और चुन्नीलाल जीतसिंह के सामने आये और बिना कहे जनेऊ और ऐयारी का बटुआ हाथ में लेकर कसम खाकर बोले, ‘‘आज से मैं राजा सुरेन्द्रसिंह और उनके खानदान का नौकर हुआ। ईमानदारी और मेहनत से अपना काम करूंगा। तेज़सिंह, देवीसिंह और ज्योतिषीजी को अपना भाई समझूंगा। बस, अब तो रस्म पूरी हो गई?’’
‘‘बस, और कुछ बाकी नहीं।’’ इतना कहकर जीतसिंह ने चारों को गले से लगा लिया, फिर से चारों ऐयार सुरेन्द्रसिंह के पीछे जा खड़े हुए।
पन्नालाल, रामनारायण और चुन्नीलाल जीतसिंह के सामने आये और बिना कहे जनेऊ और ऐयारी का बटुआ हाथ में लेकर कसम खाकर बोले, ‘‘आज से मैं राजा सुरेन्द्रसिंह और उनके खानदान का नौकर हुआ। ईमानदारी और मेहनत से अपना काम करूंगा। तेज़सिंह, देवीसिंह और ज्योतिषीजी को अपना भाई समझूंगा। बस, अब तो रस्म पूरी हो गई?’’
‘‘बस, और कुछ बाकी नहीं।’’ इतना कहकर जीतसिंह ने चारों को गले से लगा लिया, फिर से चारों ऐयार सुरेन्द्रसिंह के पीछे जा खड़े हुए।