जीतसिंह : जी हां, घर ही में कुछ खास काम था, मगर अबकी तो दूर जाना है इसलिए पन्द्रह दिन की छुट्टी मांगता हूं। मेरी जगह पं. बद्रीनाथ काम करेंगे, किसी बात का हर्ज़ न होगा।
सुरेन्द्र : अच्छा जाओ, लेकिन जहां तक हो सके जल्द आना।
राजा सुरेन्द्रसिंह से विदा हो जीतसिंह अपने घर गये और बद्रीनाथ वगैरह चारों ऐयारों को भी कुछ समझाने-बुझाने के लिए साथ लेते गये।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : पांचवाँ बयान)
कुंवर वीरेन्द्रसिंह तीनो ऐयारों
जीतसिंह : जी हां, घर ही में कुछ खास काम था, मगर अबकी तो दूर जाना है इसलिए पन्द्रह दिन की छुट्टी मांगता हूं। मेरी जगह पं. बद्रीनाथ काम करेंगे, किसी बात का हर्ज़ न होगा।
सुरेन्द्र : अच्छा जाओ, लेकिन जहां तक हो सके जल्द आना।
राजा सुरेन्द्रसिंह से विदा हो जीतसिंह अपने घर गये और बद्रीनाथ वगैरह चारों ऐयारों को भी कुछ समझाने-बुझाने के लिए साथ लेते गये।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : पांचवाँ बयान)
कुंवर वीरेन्द्रसिंह तीनो ऐयारों