सो निकल गया, तिलिस्म टूट गया। अब हाथ मल के पछताओ।
तेज़सिंह : (कुमार की तरफ देखकर) देखिए, यह पूरा सबूत तिलिस्म टूटने का मिल गया।
कुमार : जब तिलिस्म टूट ही चुका है तो उसके हर एक दरवाज़े भी खुले होंगे। हां ज़रूर खुले होंगे। यह कहकर तेज़सिंह पहाड़ियों पर चढ़ाते-घुमाते-फिराते कुमार को एक गुफा के पास ले गये जिसमें सिर्फ एक आदमी के जाने लायक राह थी।
तेज़सिंह के कहने से एक-एक करके चारों आदमी उस गुफा में घूमे। भीतर कुछ दूर जाकर खुलासा जगह मिली,
सो निकल गया, तिलिस्म टूट गया। अब हाथ मल के पछताओ।
तेज़सिंह : (कुमार की तरफ देखकर) देखिए, यह पूरा सबूत तिलिस्म टूटने का मिल गया।
कुमार : जब तिलिस्म टूट ही चुका है तो उसके हर एक दरवाज़े भी खुले होंगे। हां ज़रूर खुले होंगे। यह कहकर तेज़सिंह पहाड़ियों पर चढ़ाते-घुमाते-फिराते कुमार को एक गुफा के पास ले गये जिसमें सिर्फ एक आदमी के जाने लायक राह थी।
तेज़सिंह के कहने से एक-एक करके चारों आदमी उस गुफा में घूमे। भीतर कुछ दूर जाकर खुलासा जगह मिली,