चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



बाग में घूमने और इधर-उधर देखने से मालूम हुआ कि ये लोग पहाड़ी के ऊपर चले गये हैं। जब फौवारे के पास पहुंचे तो एक बात ताज्जुब की दिखाई पड़ी। उस जगह ज़मीन पर जनाने हाथों का एक जोड़ा कंगन नज़र पड़ा, जिसे देखते ही कुमार ने पहचान लिया कि कुमारी चन्द्रकान्ता के हाथों का यह है। झट उठा लिया, आंखों से आंसू की बूंदें टपकने लगीं, तेज़सिंह से पूछा–‘‘यह कंगन यहां क्योंकर पहुंचा? इसके बारे में क्या खयाल किया जाये?’’ तेज़सिंह कुछ जवाब


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बाग में घूमने और इधर-उधर देखने से मालूम हुआ कि ये लोग पहाड़ी के ऊपर चले गये हैं। जब फौवारे के पास पहुंचे तो एक बात ताज्जुब की दिखाई पड़ी। उस जगह ज़मीन पर जनाने हाथों का एक जोड़ा कंगन नज़र पड़ा, जिसे देखते ही कुमार ने पहचान लिया कि कुमारी चन्द्रकान्ता के हाथों का यह है। झट उठा लिया, आंखों से आंसू की बूंदें टपकने लगीं, तेज़सिंह से पूछा–‘‘यह कंगन यहां क्योंकर पहुंचा? इसके बारे में क्या खयाल किया जाये?’’ तेज़सिंह कुछ जवाब


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