देना ही चाहते थे कि उनकी निगाह एक काग़ज़ पर जा पड़ी जो उस जगह चिट्ठी की तरह मोड़ा हुआ पड़ा था। जल्दी से उठा लिया और खोलकर पढ़ा यह लिखा था–
‘‘बड़ी होशियारी से जाना, ऐयार लोग पीछा करेंगे, ऐसा न हो कि पता लग जाये नहीं तो तुम्हारा और कुमार दोनों ही का बड़ा भारी नुकसान होगा। अगर मौका मिला तो कल आऊंगा। वहीं।’’
इस पुर्जे को पढ़कर तेज़सिंह किसी सोच में पड़े गये, देर तक चुपचाप खड़े न जाने क्या-क्या विचार करते रहे। आखिर कुमार से न रहा गया,
देना ही चाहते थे कि उनकी निगाह एक काग़ज़ पर जा पड़ी जो उस जगह चिट्ठी की तरह मोड़ा हुआ पड़ा था। जल्दी से उठा लिया और खोलकर पढ़ा यह लिखा था–
‘‘बड़ी होशियारी से जाना, ऐयार लोग पीछा करेंगे, ऐसा न हो कि पता लग जाये नहीं तो तुम्हारा और कुमार दोनों ही का बड़ा भारी नुकसान होगा। अगर मौका मिला तो कल आऊंगा। वहीं।’’
इस पुर्जे को पढ़कर तेज़सिंह किसी सोच में पड़े गये, देर तक चुपचाप खड़े न जाने क्या-क्या विचार करते रहे। आखिर कुमार से न रहा गया,