चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

पूछा, ‘‘क्यों? क्या सोच रहे हो? इस चिट्ठी में क्या लिखा है?’’

तेज़सिंह ने वह चिट्ठी कुमार के हाथों में दे दी, वे भी पढ़कर हैरान हो गये, बोले, ‘‘इसमें जो कुछ लिखा है उस पर गौर करने से तो मालूम होता है कि हमारे वनकन्या के मामले में ही कुछ है मगर किसने लिखा यह पता नहीं लगता।’’

तेज़सिंह : आपका कहना ठीक है, पर मैं एक और बात सोच रहा हूं जो इससे भी ताज्जुब की है।

कुमार : वह क्या?

तेज़सिंह : इन हरफों को मैं कुछ पहचानता हूं


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पूछा, ‘‘क्यों? क्या सोच रहे हो? इस चिट्ठी में क्या लिखा है?’’

तेज़सिंह ने वह चिट्ठी कुमार के हाथों में दे दी, वे भी पढ़कर हैरान हो गये, बोले, ‘‘इसमें जो कुछ लिखा है उस पर गौर करने से तो मालूम होता है कि हमारे वनकन्या के मामले में ही कुछ है मगर किसने लिखा यह पता नहीं लगता।’’

तेज़सिंह : आपका कहना ठीक है, पर मैं एक और बात सोच रहा हूं जो इससे भी ताज्जुब की है।

कुमार : वह क्या?

तेज़सिंह : इन हरफों को मैं कुछ पहचानता हूं


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