मगर साफ समझ में नहीं आता क्योंकि लिखने वाले ने अपना हर्फ छिपाने के लिए कुछ बिगाड़ कर लिखा है।
कुमार : खैर, इस चिट्ठी को रख छोड़ो। कभी-न-कभी कुछ पता लग ही जायेगा अब आगे का काम करो।
फिर ये लोग घूमने लगे, बाग के कोने में इन लोगों को छोटी-छोटी चार खिड़कियां नज़र आई जो एक के साथ एक बराबर सी बनी हुई थीं, पहले चारों आदमी बाईं तरफ वाली खिड़की में घुसे। थोड़ी दूर जाकर एक दरवाज़ा मिला जिसके आगे जाने की विल्कुल राह न थी क्योंकि नीचे बेढब खतरनाक पहाड़ी दिखाई देती थी।
मगर साफ समझ में नहीं आता क्योंकि लिखने वाले ने अपना हर्फ छिपाने के लिए कुछ बिगाड़ कर लिखा है।
कुमार : खैर, इस चिट्ठी को रख छोड़ो। कभी-न-कभी कुछ पता लग ही जायेगा अब आगे का काम करो।
फिर ये लोग घूमने लगे, बाग के कोने में इन लोगों को छोटी-छोटी चार खिड़कियां नज़र आई जो एक के साथ एक बराबर सी बनी हुई थीं, पहले चारों आदमी बाईं तरफ वाली खिड़की में घुसे। थोड़ी दूर जाकर एक दरवाज़ा मिला जिसके आगे जाने की विल्कुल राह न थी क्योंकि नीचे बेढब खतरनाक पहाड़ी दिखाई देती थी।