इधर-उधर देखने और खूब गौर करने से मालूम हुआ कि यह वही दरवाज़ा है जिसको इशारे से उस योगी ने तेज़सिंह को दिखाया था। इस जगह से वह दालान बहुत साफ दिखाई देता था जिसमें कुमारी चन्द्रकान्ता और चपला बहुत दिनों तक बेबस पड़ी रही थीं।
ये लोग वापस होकर फिर उसी बाग में चले आये और उसके बगल वाली दूसरी खिड़की में घुसे जो बहुत अंधेरी थी। कुछ दूर जाने पर उजाला नज़र पड़ा बल्कि हद तक पहुंचने पर एक बड़ा-सा फाटक मिला। जिससे बाहर होकर ये चारों आदमी खड़े हो चारों ओर निगाह दौड़ाने लगे।
इधर-उधर देखने और खूब गौर करने से मालूम हुआ कि यह वही दरवाज़ा है जिसको इशारे से उस योगी ने तेज़सिंह को दिखाया था। इस जगह से वह दालान बहुत साफ दिखाई देता था जिसमें कुमारी चन्द्रकान्ता और चपला बहुत दिनों तक बेबस पड़ी रही थीं।
ये लोग वापस होकर फिर उसी बाग में चले आये और उसके बगल वाली दूसरी खिड़की में घुसे जो बहुत अंधेरी थी। कुछ दूर जाने पर उजाला नज़र पड़ा बल्कि हद तक पहुंचने पर एक बड़ा-सा फाटक मिला। जिससे बाहर होकर ये चारों आदमी खड़े हो चारों ओर निगाह दौड़ाने लगे।