वगैरह को देखते ही तेज़ी के साथ बाग के एक कोने में जाकर गायब हो गयी।
चारों आदमियों ने उसका पीछा किया और घूम-घूमकर तलाश भी किया, मगर कहीं कुछ भी पता न लगा, हां, जिस कोने में वे सब गायब हुई थीं वहां जाने पर एक बंद दरवाज़ा ज़रूर देखा जिसके खोलने की बहुत युक्ति लगायी मगर न खुला।
उस बाग के एक तरफ छोटी-सी बारादरी थी। लाचार होकर ऐयारों के साथ कुंवर वीरेन्द्रसिंह उस बारहदरी में एक ओर बैठकर सोचने लगे, ‘‘यह वनकन्या यहां कैसे आयी?
वगैरह को देखते ही तेज़ी के साथ बाग के एक कोने में जाकर गायब हो गयी।
चारों आदमियों ने उसका पीछा किया और घूम-घूमकर तलाश भी किया, मगर कहीं कुछ भी पता न लगा, हां, जिस कोने में वे सब गायब हुई थीं वहां जाने पर एक बंद दरवाज़ा ज़रूर देखा जिसके खोलने की बहुत युक्ति लगायी मगर न खुला।
उस बाग के एक तरफ छोटी-सी बारादरी थी। लाचार होकर ऐयारों के साथ कुंवर वीरेन्द्रसिंह उस बारहदरी में एक ओर बैठकर सोचने लगे, ‘‘यह वनकन्या यहां कैसे आयी?