क्या उसके रहने का यही ठिकाना है? फिर हम लोगों को देखकर भाग क्यों गई? क्या अभी हमसे मिलना उसे मंजूर नहीं?’’ इन सब बातों को सोचते-सोचते शाम हो गई मगर किसी की अक्ल ने कुछ काम न दिया। इस बाग में मेवों के दरख्त बहुत थे और एक छोटा-सा चश्मा भी था। चारों आदमियों ने मेवों से अपना पेट भरा और चश्में का पानी पीकर उसी बारादरी में ज़मीन पर लेट गये। यह राय ठहरी कि रात को इसी बारहदरी में गुज़ारा करेंगे, सवेरे जो कुछ होगा देखा जायेगा।
क्या उसके रहने का यही ठिकाना है? फिर हम लोगों को देखकर भाग क्यों गई? क्या अभी हमसे मिलना उसे मंजूर नहीं?’’ इन सब बातों को सोचते-सोचते शाम हो गई मगर किसी की अक्ल ने कुछ काम न दिया। इस बाग में मेवों के दरख्त बहुत थे और एक छोटा-सा चश्मा भी था। चारों आदमियों ने मेवों से अपना पेट भरा और चश्में का पानी पीकर उसी बारादरी में ज़मीन पर लेट गये। यह राय ठहरी कि रात को इसी बारहदरी में गुज़ारा करेंगे, सवेरे जो कुछ होगा देखा जायेगा।