देवीसिंह ने अपने बटुए में से सामान निकालकर चिराग जलाया, इसके बाद बैठकर आपस में बातें करने लगे।
कुमार : चन्द्रकान्ता की मुहब्बत में हमारी दुर्गति हो गई, तिस पर भी अब तक कोई उम्मीद नहीं मालूम पड़ती।
तेज़सिंह : कुमारी सही सलामत हैं और आपको मिलेगीं इसमें कोई शक नहीं। जितनी मेहनत से जो चीज़ मिलती है उसके साथ उतनी ही खुशी से ज़िंदगी बीतती है।
कुमार : तुमने चपला के लिए कौन-सी तकलीफ उठाई?
तेज़सिंह : तो चपला ने ही मेरे लिए
देवीसिंह ने अपने बटुए में से सामान निकालकर चिराग जलाया, इसके बाद बैठकर आपस में बातें करने लगे।
कुमार : चन्द्रकान्ता की मुहब्बत में हमारी दुर्गति हो गई, तिस पर भी अब तक कोई उम्मीद नहीं मालूम पड़ती।
तेज़सिंह : कुमारी सही सलामत हैं और आपको मिलेगीं इसमें कोई शक नहीं। जितनी मेहनत से जो चीज़ मिलती है उसके साथ उतनी ही खुशी से ज़िंदगी बीतती है।
कुमार : तुमने चपला के लिए कौन-सी तकलीफ उठाई?
तेज़सिंह : तो चपला ने ही मेरे लिए